सदस्य

संस्था के उद्देश्य व कार्यक्रम में विश्वास एवं आस्था रखने वाले तेली ( तैलिक, साहू, धांची, राठौर एवं मोदी ) समाज के 18 वर्ष से अधिक आयु के वे पुरूष एवं महिलाएं जो संस्था के उद्देश्य व कार्यक्रम के अनुसार स्वजाति की उन्नति एवं सेवा के इच्छुक हो ऐसे पुरूष, महिला, संस्था का निर्धारित सदस्यता शुल्क अदा कर संस्था के सदस्य बन सकेंगे।

1. संस्था के सदस्य दो प्रकार के होंगे :

(1) साधारण सदस्य

(2) आजीवन सदस्य

साधारण सदस्य

  • साधारण सदस्य की सदस्यता तीन वर्ष (कार्यकारिणी का एक कार्यकाल) के लिए होगी जिसका सदस्यता शुल्क 100 रु. ( सौ रुपया ) प्रति कार्यकाल, तीन वर्ष होगा।
  • प्रत्येक साधारण सदस्य को ईकाइ एवं तहसील स्तर की कार्यकारिणी के निर्वाचन में | ( उम्मीदवार ) भाग लेने का अधिकार होगा (साधारण सदस्य - मत देना व उम्मीदवार बनना )।

आजीवन सदस्य

  • आजीवन सदस्य की सदस्यता। आजीवन ( जीवनपर्यन्त ) होगी, जिसका शुल्क रू.500/- ( रूपये पांच सौ ) होगा।
  • आजीवन सदस्य को इकाई स्तर से प्रादेशिक स्तर तक के निर्वाचन में ( उम्मीदवार ) भाग लेने का अधिकार होगा ( मत देना व उम्मीदवार बनना )।

सदस्यता शुल्क का विभाजन :-

सदस्यता शुल्क का विभाजन निम्नानुसार होगाः- तहसील स्तर पर 20 प्रतिशत, जिला स्तर पर 30 प्रतिशत, प्रान्तीय स्तर पर 40 प्रतिशत एवं राष्ट्रीय स्तर पर 10 प्रतिशत राशि का विभाजन होगा। संस्था की उक्त राशि बैंक खाता में जमा करवाई जायेगी। सुविधानुसार प्राप्त राशि में से कम से कम 50 प्रतिशत राशि की एफ.डी. करवाई जावे।

सभा की अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां

साधारण सभा का स्वरूप प्रादेशिक, जिला, तहसील एवम् इकाई स्तर पर साधारण सभा (महासभा) का गठन उपरोक्त अनुसार दोनों प्रकार के सदस्यों से होगा:-

1. प्रादेशिक, साधारण सभा में प्रदेश के सभी आजीवन सदस्य, प्रान्तीय कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री एवं तहसील अध्यक्ष, मंत्रीगण सदस्य होंगे।

2. जिला साधारण सभा :जिला साधारण सभा में जिले के सभी आजीवन सदस्य, जिला कार्यकारिणी, तहसील अध्यक्ष, महामंत्री एवं इकाई अध्यक्ष, मंत्री सदस्य होंगे।

3. तहसील साधारण सभा में तहसील क्षेत्र के आजीवन एवं साधारण सदस्य तहसील कार्यकारिणी, ईकाई अध्यक्ष, मंत्री व सदस्य होंगे।

4. इकाई साधारण सभा में इकाई (ग्राम/नगर) क्षेत्र के सभी आजीवन एवं साधारण सदस्य ईकाई कार्यकारिणी सदस्य होंगे।

1. संस्था की साधारण सभा जिसे महासभा के नाम से उल्लेख किया जायेगा। राजस्थान में स्वजाति के सदस्यों के लिए सर्वोच्च संस्था होगी। समाज के विकास व उन्नति के लिए रीति-नीति निर्धारित करने व निर्णय लेने का महासभा को पूर्ण अधिकार होगा। संस्था का कोई भी सदस्य इसके निर्णय व अधिकारों को कहीं भी चुनौती नहीं दे सकेगा।

2. समाज के सुधार, प्रगति व उत्थान के लिए निर्णय लेकर नियम बनाना एवं उसकी क्रियान्विति हेतु प्रयत्न करना।

3. संस्था की कार्यकारिणी समिति द्वारा संस्था के विधान में परिवर्तन, परिवर्धन व संशोधन | करने के प्रस्ताव पर विचार करना एवं उस पर प्रान्तीय महासभा से निर्णय करवाना।

4. कार्यकारिणी द्वारा संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाये गये कार्यक्रम व नियमों पर विचार कर उस पर स्वीकृति प्रदान करना।

5. महासभा की कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत आय-व्यय के वार्षिक अनुमान पत्रों पर विचार कर उन पर स्वीकृति प्रदान करना।

वार्षिक आय व्यय के ओडिटर द्वारा परीक्षण विवरण पत्रों पर विचार कर स्वीकृति प्रदान करते हुए अनुपालना करना तथा भविष्य के लिए सुझाव देकर मार्गदर्शन करना।

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