महासभा के उद्देश्य

उद्देश्य

1. समाज को प्रादेशिक, जिला, तहसील, ग्राम/नगर ईकाई स्तर पर संगठित कर सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवम् राजनैतिक उत्थान व विकास के लिए प्रयत्न करना।

2. समाज में व्याप्त बाल विवाह, मृत्युभोज, दहेज जैसी रूढ़िवादी परम्पराओं, कुरूतियों व कुसंस्कारों तथा विकास में बाधक अंधविश्वासों की समाप्ति के लिए प्रयत्न करना।

3. समाज में व्याप्त अशिक्षा को दूर करने के लिए बालक-बालिकाओं को शिक्षा की प्रेरणा देना व उनकी शिक्षा के लिए साधन एवम् सुविधाएं उपलब्ध करवाना।

4. महिलाओं में व्याप्त पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उनको प्रेरित एवम् संगठित कर शिक्षा, स्वरोजगार हेतु चेतना व जागृति पैदा करना।

5. नवयुवकों को राष्ट्र का सुनागरिक बनाने के लिए उनको प्रादेशिक, जिला, तहसील स्तर पर एवम् ग्राम/नगर ईकाई स्तर पर युवा संगठन ( 18 वर्ष से 40 वर्ष) के रूप में संगठित करना। 18 वर्ष से 40 की आयु के युवा।।

6. समाज में परस्पर स्नेह व सहयोग तथा एकता एवम् भाईचारे की भावना के प्रचार प्रसार के लिए समय समय पर सभा सम्मेलन व सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन व प्रचार प्रकाशन की व्यवस्था कराना।

7. संस्था के सभी कार्य समाज कल्याण व परामर्श की भावना एवम् उद्देश्य से करना।

8. संस्था का उद्देश्य लाभ अर्जित करना नहीं है। संस्था लाभ अर्जित नहीं करने के उद्देश्य से संचालित की जायेगी।

संस्था के सदस्य एवं शुल्क

संस्था के उद्देश्य व कार्यक्रम में विश्वास एवं आस्था रखने वाले तेली ( तैलिक, साहू, धांची, राठौर एवं मोदी ) समाज के 18 वर्ष से अधिक आयु के वे पुरूष एवं महिलाएं जो संस्था के उद्देश्य व कार्यक्रम के अनुसार स्वजाति की उन्नति एवं सेवा के इच्छुक हो ऐसे पुरूष, महिला, संस्था का निर्धारित सदस्यता शुल्क अदा कर संस्था के सदस्य बन सकेंगे।

  1. संस्था के सदस्य दो प्रकार के होंगे :
    • साधारण सदस्य
    • आजीवन सदस्य
  2. साधारण सदस्य :- साधारण सदस्य की सदस्यता तीन वर्ष (कार्यकारिणी का एक कार्यकाल) के लिए होगी जिसका सदस्यता शुल्क 100 रु. ( सौ रुपया ) प्रति कार्यकाल, तीन वर्ष होगा।
  3. आजीवन सदस्य :- आजीवन सदस्य की सदस्यता। आजीवन ( जीवनपर्यन्त ) होगी, जिसका शुल्क रू.500/- ( रूपये पांच सौ ) होगा।
  4. प्रत्येक साधारण सदस्य को ईकाइ एवं तहसील स्तर की कार्यकारिणी के निर्वाचन में | ( उम्मीदवार ) भाग लेने का अधिकार होगा (साधारण सदस्य - मत देना व उम्मीदवार बनना )।
  5. आजीवन सदस्य को इकाई स्तर से प्रादेशिक स्तर तक के निर्वाचन में ( उम्मीदवार ) भाग लेने का अधिकार होगा ( मत देना व उम्मीदवार बनना )।
  6. सदस्यता शुल्क का विभाजन :- सदस्यता शुल्क का विभाजन निम्नानुसार होगाः- तहसील स्तर पर 20 प्रतिशत, जिला स्तर पर 30 प्रतिशत, प्रान्तीय स्तर पर 40 प्रतिशत एवं राष्ट्रीय स्तर पर 10 प्रतिशत राशि का विभाजन होगा। संस्था की उक्त राशि बैंक खाता में जमा करवाई जायेगी। सुविधानुसार प्राप्त राशि में से कम से कम 50 प्रतिशत राशि की एफ.डी. करवाई जावे।

साधारण सभा( महासभा)

साधारण सभा का स्वरूप प्रादेशिक, जिला, तहसील एवम् इकाई स्तर पर साधारण सभा (महासभा) का गठन उपरोक्त अनुसार दोनों प्रकार के सदस्यों से होगा

  1. प्रादेशिक, साधारण सभा में प्रदेश के सभी आजीवन सदस्य, प्रान्तीय कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री एवं तहसील अध्यक्ष, मंत्रीगण सदस्य होंगे।
  2. जिला साधारण सभा :जिला साधारण सभा में जिले के सभी आजीवन सदस्य, जिला कार्यकारिणी, तहसील अध्यक्ष, महामंत्री एवं इकाई अध्यक्ष, मंत्री सदस्य होंगे।
  3. तहसील साधारण सभा में तहसील क्षेत्र के आजीवन एवं साधारण सदस्य तहसील कार्यकारिणी, ईकाई अध्यक्ष, मंत्री व सदस्य होंगे।
  4. इकाई साधारण सभा में इकाई (ग्राम/नगर) क्षेत्र के सभी आजीवन एवं साधारण सदस्य ईकाई कार्यकारिणी सदस्य होंगे।

साधारण सभा के अधिकार एवं कर्तव्य

साधारण सभा का स्वरूप प्रादेशिक, जिला, तहसील एवम् इकाई स्तर पर साधारण सभा (महासभा) का गठन उपरोक्त अनुसार दोनों प्रकार के सदस्यों से होगा

  1. संस्था की साधारण सभा जिसे महासभा के नाम से उल्लेख किया जायेगा। राजस्थान में स्वजाति के सदस्यों के लिए सर्वोच्च संस्था होगी। समाज के विकास व उन्नति के लिए रीति-नीति निर्धारित करने व निर्णय लेने का महासभा को पूर्ण अधिकार होगा। संस्था का कोई भी सदस्य इसके निर्णय व अधिकारों को कहीं भी चुनौती नहीं दे सकेगा।
  2. समाज के सुधार, प्रगति व उत्थान के लिए निर्णय लेकर नियम बनाना एवं उसकी क्रियान्विति हेतु प्रयत्न करना।
  3. संस्था की कार्यकारिणी समिति द्वारा संस्था के विधान में परिवर्तन, परिवर्धन व संशोधन | करने के प्रस्ताव पर विचार करना एवं उस पर प्रान्तीय महासभा से निर्णय करवाना।
  4. कार्यकारिणी द्वारा संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाये गये कार्यक्रम व नियमों पर विचार कर उस पर स्वीकृति प्रदान करना।
  5. महासभा की कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत आय-व्यय के वार्षिक अनुमान पत्रों पर विचार कर उन पर स्वीकृति प्रदान करना।
वार्षिक आय व्यय के ओडिटर द्वारा परीक्षण विवरण पत्रों पर विचार कर स्वीकृति प्रदान करते हुए अनुपालना करना तथा भविष्य के लिए सुझाव देकर मार्गदर्शन करना।

कार्यकारिणी समिति का गठन, चुनाव प्रक्रिया एवम् कार्यकाल

साधारण सभा का स्वरूप प्रादेशिक, जिला, तहसील एवम् इकाई स्तर पर साधारण सभा (महासभा) का गठन उपरोक्त अनुसार दोनों प्रकार के सदस्यों से होगा

  1. महासभा ( समिति ) के कार्य संचालन हेतु प्रत्येक स्तर ( ईकाई- तहसील, जिला एवं प्रदेश) पर कार्य संचालन समिति/कार्यकारिणी समिति का गठन/निर्वाचन होना आवश्यक है जो विहित रीति से प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से होगा। यदि निर्वाचन संभव नहीं हो तो प्रदेशाध्यक्ष जिला अध्यक्ष/कार्य संचालन समिति का, जिले के लिए मनोनयन कर सकेगा। इसी प्रकार जिला अध्यक्ष, प्रदेशाध्यक्ष की सहमति से तहसील अध्यक्ष/तहसील कार्य संचालन समिति का मनोनयन कर सकेगा तथा तहसील अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष की सहमति से ईकाई अध्यक्ष ईकाई कार्य सं चालन समिति का गठन/मनोनयन कर सकेगा।
  2. कार्यकारिणी ( समिति ) की निर्वाचन प्रक्रिया :
    • (अ) - इकाई कार्यकारिणी :- किसी भी ग्राम/नगर में जहां समाज के दहाई सख्या से अधिक परिवार निवास करते है वहां इकाई कार्यकारिणी समिति का गठन/निर्वाचन होगा। जिसमे इकाई अध्यक्ष, मंत्री एवं कम से कम तीन सदस्य होंगे। इनका निर्वाचन इस ग्राम/नगर में निवास करने वाले परिवारों के मुखियाओं द्वारा आम सहमति/चुनाव के माध्यम से होगा।
    • (ब) - तहसील कार्यकारिणी समिति में तहसील अध्यक्ष का निर्वाचन तहसील क्षेत्र के समस्त साधारण/आजीवन सदस्य तथा इकाई अध्यक्ष एवं मंत्री मिलकर करेंगे। तहसील शाखा के अध्यक्ष के अतिरिक्त शेष छः ( 6 पदों) ( संरक्षक, उपाध्यक्ष, मंत्री, संगठन, मंत्री, कोषाध्यक्ष, प्रचार मंत्री/प्रवक्ता ) का मनोनयन तहसील अध्यक्ष द्वारा इकाई अध्यक्षों की आम सहमति एवं जिला अध्यक्ष के अनुमोदन के पश्चात एक माह की अवधि में किया जाकर जिला अध्यक्ष को सूचना भिजवाना आवश्यक होगा।
    • (स) - जिला शाखा कार्यकारिणी समिति में जिला अध्यक्ष का निर्वाचन जिला के समस्त आजीवन सदस्य तथा प्रत्येक तहसील शाखा के बिन्दु संख्या 9 (ब) में अंकित सात पदाधिकारी मिलकर करेंगे। जिला शाखा के शेष आवश्यकतानुसार 21 पदों (संरक्षक, उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, संगठन मंत्री, प्रचारमंत्री, प्रवक्ता एवम् सदस्य) का मनोनयन जिला अध्यक्ष द्वारा तहसील अध्यक्षों की आम सहमति, प्रदेशाध्यक्ष के अनुमोदन के पश्चात् दो माह की अवधि में किया जाकर प्रदेशाध्यक्ष/ प्रदेश महामंत्री को सूचना देना ( लिखित में ) आवश्यक होगा।
      नोट :- जिन जिलों ( यथा- सीकर, झुंझुनु, चूरू, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ आदि) में समाज बन्धुओं की आबादी कम होने से ऐसे जिलों की जिला कार्यकारिणी समिति में पदों की संख्या 11 रहेगी।
    • (द) - प्रदेश कार्यकारिणी समिति में प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन प्रदेश महासभा ( साधारण सभा) के समस्त आजीवन सदस्य तथा सभी जिलो के शीर्षतम ग्यारह पदाधिकारी एवम् निवर्तमान होने वाली वर्तमान कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण मिलकर करेगे इन सभी का अजीवन सदस्य होना अनिवार्य होगा। प्रदेशाध्यक्ष द्वारा कार्यकारिणी का गठन तीन माह में किया जायेगा।

    • (अ) - कार्यकारिणी समिति का गठन :- संस्था की कार्यकारिणी प्रदेश स्तर पर एक कार्यकारिणी समिति होगी।
    • (ब) - जिला कार्यकारिणी समिति प्रत्येक जिले में एक कार्यकारिणी समिति तथा संभाग मुख्यालय जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर में शहर जिला अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी तथा ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी होगी। इसी प्रकार भीलवाड़ा जिले में समाज बन्धुओं की आबादी अत्यधिक होने के कारण भीलवाड़ा में भी शहर जिला अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी तथा ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी होगी।
    • (स) - तहसील एवं ग्राम/नगर इकाई अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी उक्तानुसार पृथक-पृथक होगी।
    • (द) - तहसील एवं ग्राम/नगर इकाई अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी उक्तानुसार पृथक-पृथक होगी।
  3. संस्था के निर्वतमान अध्यक्ष महामंत्री आगामी 3 वर्षों के लिए सदस्य होंगे।
  4. अखिल भारतीय महासभा में राजस्थान के पदाधिकारी प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री कार्यकारिणी के पदेन सदस्य होंगे।
  5. संस्था की जिला शाखाओं के अध्यक्ष/महामंत्री अपने कार्यकाल की अवधि में संस्था की कार्यकारिणी समिति के पदेन सदस्य होंगे।
  6. किसी भी कारण से जिला शाखा के या तहसील शाखाओं के प्रतिनिधियों/ कार्यकारिणी की सूची प्राप्त ना हो तो प्रदेश द्वारा जारी सूची वैध मानी जायेगी।
  7. ग्राम/नगर इकाई, तहसील, जिला, प्रदेश कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। कार्यकारिणी के कार्यकाल की गणना कलेण्डर वर्ष के अनुरूप 2015, 2016, 2017 तीन वर्ष होगी। इसी क्रमानुसार आगामी कार्यकारिणी का कार्यकाल होगा।
  8. महासभा का सदस्यता अभियान :- महासभा की कार्यकारिणी अवधि तीन वर्ष के अन्तिम वर्ष में जनवरी माह से अप्रेल माह तक साधारण/आजीवन सदस्य बनाना होगा।(अवधि 4 माह)
  9. कार्यकारिणी निर्वाचन अवधि
    • (अ) - ग्राम/नगर इकाईयों का निर्वाचन माह मई जून ( दो माह में ) तक होगा।
    • (ब) - तहसील शाखाओं का निर्वाचन :- जुलाई-अगस्त तक ( दो माह में ) होगा।
    • (स) - जिला शाखाओं का निर्वाचन :- (दो माह) सितम्बर-अक्टूबर तक होगा।
    • (द) - प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन :- नवम्बर-दिसम्बर तक ( दो माह ) होगा।

प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी

प्रदेश कार्यकारिणी समिति में निम्न पदाधिकारी होंगे -

  1. संरक्षक - श्री श्री सावरियाँ सेठ शंकर भोले एवं एक पद (निर्वतमान प्रदेशाध्यक्ष)
  2. प्रदेश अध्यक्ष - एक पद ( प्रदेशाध्यक्ष)
  3. उपाध्यक्ष - सात पद (प्रत्येक संभाग से एक)
  4. महामंत्री - दो पद
  5. कोषाध्यक्ष - दो पद
  6. मंत्री - दो पद
  7. संगठन महामंत्री - एक पद 7ए. संगठन मंत्री - सात पद (प्रत्येक संभाग से एक)
  8. प्रचार मंत्री - तीन पद
  9. संभागीय मंत्री - सात पद ( प्रत्येक संभाग से एक)
  10. संभाग प्रभारी - सात पद (प्रत्येक संभाग से एक)
  11. प्रदेश प्रवक्ता - तीन पद
  12. सलाहकार मण्डल - तीन पद
  13. विशिष्ट आमंत्रित सदस्य - 14 पद
  14. आमंत्रित सदस्य -7 पद
  15. समन्वयक प्रभारी - दो पद
विशेष - प्रदेशाध्यक्ष द्वारा कार्य की व्यवस्था के अनुसार उपरोक्त पदों की संख्या को कम या अधिक कर सकेंगे।

पकार्यकारिणी समिति के अधिकार व कर्तव्य

निम्न प्रकार होंगे:

  1. महासभा द्वारा समाज की प्रगति एवं सुधार के लिए किये गये निर्णय को कार्य रूप देना तथा उसके सुझावों व मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करना।
  2. पसंस्था के विधान में वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए रीति नीति निर्धारित करना, कार्यक्रम बनाना व महासभा से उनका अनुमोदन करवाना।
  3. महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जिला शाखाओं का गठन कर उनके चुनाव करवाना या आवश्यकता होने पर तदर्थ समिति गठित करना।
  4. समाज में जागृति उत्पन्न कर एकता व भाईचारे तथा अपनत्व की भावना का प्रसार करने के उद्देश्य से सभा सम्मेलन का आयोजन करना।
  5. महासभा के पदाधिकारियों का चुनाव करवाना तथा किसी पदाधिकारी/सदस्य द्वारा त्यागपत्र देने या संस्था के हित में अलग किये जाने पर रिक्त स्थान की पूर्ति चुनाव या सहवरण से करना।
  6. संस्था के उद्देश्य व कार्यक्रम की पूर्ति के लिए वार्षिक आय व्यय के अनुमान पत्र (बजट) स्वीकृत करना तथा उसके अनुसार खर्च की स्वीकृति प्रदान करना।
  7. संस्था के वार्षिक आय व्यय का ऑडिट करवाना तथा ऑडिट विवरण पत्रों का साधारण सभा से अनुमोदन करवाना।
  8. पसंस्था के विधान/संविधान में आवश्यकतानुसार परिवर्तन/परिवर्धन व संशोधन करना तथा महासभा से अनुमोदन करवाना तथा रजिस्ट्रार संस्थाएं राजस्थान को सूचित कर उसकी स्वीकृति प्राप्त करना।
  9. संस्था के अध्यक्ष, महामंत्री व आवश्यकतानुसार अन्य किसी सदस्य को संस्था की ओर से आवश्यक दस्तावेज व अनुबन्ध पत्रों, बैंक खाता चैकों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार प्रदान करना।
  10. संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए चल, अचल सम्पत्ति का क्रय व निर्माण करना/ व करने का निर्णय लेना एवं स्वीकृति प्रदान करना।
  11. पसंस्था के उद्देश्य की पूर्ति व कार्य संचालन के लिए आवश्यकतानुसार वेतनिक व अवैतनिक कर्मचारी नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान करना।

संस्था के पदाधिकारियों के कर्तव्य

  1. संरक्षक संस्था की रीति नीति निर्धारण करने, कार्यक्रम बनाने, संस्था की संवैधानिक स्थिति बनाये रखने, विधान नियमों के अनुरूप कार्य करने में पदाधिकारियों का मार्गदर्शन करना एवं संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सुझाव देना।
  2. संस्था के अध्यक्ष व महामंत्री द्वारा कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संविधान अनुसार निर्धारित समय पर चुनाव करवाने की घोषणा ना करने पर अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर प्रदेश कार्यकारिणी को/समिति को भंग कर नये चुनाव करवाने हेतु निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करना तथा अपनी देखरेख में चुनाव करवाना।
  3. महासभा या कार्यकारिणी की बैठक नियमानुसार ना बुलाने पर अध्यक्ष/महामंत्री को बैठक बुलाने हेतु निर्देश देना।

  • अध्यक्ष (प्रदेशाध्यक्ष) संस्था के सर्वोच्च प्रमुख पदाधिकारी होंगे इनके कर्तव्यः निम्न प्रकार होंगे।
    1. महासभा व कार्यकारिणी समिति बैठकों में उपस्थित रहकर उनकी अध्यक्षता करना एवं महामंत्री को बैठक बुलाने हेतु दिये गये निर्देशों के अनुरूप बैठक संचालन हेतु निर्देश देना तथा कार्यवाही रजिस्टर में अंकित करवा कर महामंत्री के साथ हस्ताक्षर करना।
    2. संरक्षक द्वारा दिये गये सुझावों को महत्वता देकर उनकी पूर्ति करना।
    3. संस्था का प्रतिनिधित्व करना, कार्यक्रम व रीति नीति क्रियान्वित करना, पदाधिकारियों के कार्य का विभाजन करना, उनके कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक सुझाव/मार्गदर्शन करना।
    4. प्रदेश के समस्त पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, जिला मंत्रियों से निरन्तर समन्वय स्थापित कर ___संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति करवाना। संस्था के निष्क्रिय पदाधिकारी (सभी स्तर पर ) जो निरन्तर तीन बैठकों में भाग नहीं ले रहे हैं उन्हें हटाकर उनके स्थान पर सक्रिय समाज बन्धु की नियुक्ति करना।
  • उपाध्यक्षः
    महासभा के उपाध्यक्ष अपने अपने संभाग में महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सभी संभाग पदाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक मार्गदर्शन देंगे तथा अध्यक्ष (प्रदेशाध्यक्ष) की अनुपस्थिति में अपने-अपने संभाग क्षेत्र की सभी सभा व समारोह की अध्यक्षता करेंगे तथा संभाग में समाज के उत्थान व संगठन को सक्रिय बनाने के दायित्वों का निर्वहन करेंगे। प्रदेश स्तर पर महासभा/प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष की अनपुस्थिति पर वरिष्ठतम क्रमानुसार उपाध्यक्ष उस बैठक की अध्यक्षता करेंगे ।
  • महामंत्री के कर्तव्य निम्नानुसार होंगे:
    1. अध्यक्ष की सलाह व निर्देशन के अनुसार प्रदेश महासभा/प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाना, बैठक कार्यवाही रजिस्टर में अंकित करना एवं अध्यक्ष के साथ हस्ताक्षर करना तथा अध्यक्ष के निर्देश के अनुसार व समस्त कार्य व दायित्व जो उन्हें सौंपे गये हैं को निभाना।
    2. संस्था द्वारा संचालित कार्यक्रमों व योजनाओं का प्रबन्ध व संचालन करना। बैठकों, अधिवेशन, महासभा /साधारण सभा की कार्यवाही का संचालन करना एवं इनके आयोजन की समुचित व्यवस्था करना।
    3. संस्था के कार्यालय का प्रबन्ध व संचालन करना, संस्था की ओर से आवश्यक पत्र व्यवहार करना, अनुबन्ध पत्र व दस्तावेजों तथा बैंक खाते में व चैक पर हस्ताक्षर करना।
    4. महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए योजना, कार्यक्रम बनाना तथा उन्हें कार्यकारिणी समिति से स्वीकृत करवाना, कार्यकारिणी समिति द्वारा स्वीकृत वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारी की नियुक्ति करना, उन्हें हटाना तथा वेतन व पुरस्कार देना।
    5. कार्यकारिणी समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव व निर्णय के अनुसार कार्यक्रम व योजनाओं को क्रियान्वित करना।
    6. जिला शाखाओं/तहसील शाखाओं के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी से संविधान के अनुरूप कार्य करने की निगरानी करना एवं आवश्यक दिशा निर्देश देना तथा संविधान के विपरित किये गये कार्य को अवैधानिक घोषित करते हुए कार्यवाही करना।
  • कोषाध्यक्षः
    संस्था की आय व्यय का हिसाब रखना संस्था की आय को बैंक खाते में जमा करवाना, राशि की आवश्यकता होने पर अध्यक्ष के साथ चैक पर हस्ताक्षर कर राशि आहरण करना। अध्यक्ष/महामंत्री द्वारा स्वीकृत बिलों का भुगतान करना, जिला शाखाओं से सदस्यता शुल्क में से प्रदेश व केन्द्र का हिस्सा संकलित करना, रोकड़ बही, खाताबही एवं अन्य दस्तावेजों वाउचर पत्रावली का अंकन एवं संधारण करना। उपरोक्त कार्य दोनों कोषाध्यक्ष आपसी सहमति से सम्पादित करेंगे।
  • मंत्री:
    प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री के निर्देशानुसार कार्य करेंगे तथा महामंत्री के सभी कार्यों में पूर्ण सहयोग करेंगे।
  • संभागीय मंत्री:
    अपने क्षेत्र में समाज बन्धुओं को महासभा के सदस्य बनाने में सहयोग करना, समाज का संगठन बनाने में सहयोग करना। जिला संगठन के सहयोग से समाज के बालक बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करना। समाज के आंकड़े (जनगणना) एकत्रित करना व बेरोजगारों को रोजगार हेतु प्रेरणा देना उनकी सहायता करना। जिला शाखाओं का मार्गदर्शन करना।
  • संगठन महामंत्री:
    1. संगठन महामंत्री के कर्तव्य अध्यक्ष /महामंत्री के निर्देश अनुसार प्रदेश में संविधान के अनुसार महासभा संगठन को मजबूत एवं क्रियाशील बनाये रखने हेतु समाज बन्धुओं /मातृशक्ति/ युवा सार्थियों को जागृत करते हुए संगठन गतिविधियों में सदस्यता गृहण करवाते हुए जोड़ना।
    2. संगठन मंत्रियों को अपने-अपने संभाग क्षेत्र में संगठन कार्य का विस्तार/कार्य संचालन का मार्गदर्शन एवं समनवय स्थापित कर महासभा के उद्देश्यों को प्राप्त करना।
  • संगठन मंत्री के कर्तव्यः
    संगठन मंत्रियों का कार्य अपने अपने संभाग में महासभा के उद्देश्यों, कार्यक्रमों, योजनाओं आदि का प्रसार करना एवं इनके क्रियान्वयन हेतु समाज बन्धुओ (सदस्यो) को महासभा से सम्बद्ध करवाना तथा प्रदेशाध्यक्ष / महामंत्री/ संगठन महामंत्री के निर्देशानुसार संगठनात्मक ढाँचे को ईकाई, तहसील, जिला स्तर तक मजबूत करना।
  • ्रचार मंत्रीः
    1. महासभा के उद्देश्यो का प्रचार करना एवं साधारण आजीवन सदस्य बनाने में सहयोग करना एवं अध्यक्ष एवं महामंत्री के कार्यों में सहयोग करना।
    2. महासभा द्वारा निश्चित की गई योजनाओं को कार्यरूप में परिणित करवाने का प्रचार करना तथा विधान एवं उपनियमों के प्रावधानों का प्रचार करना।
  • निर्वाचन अधिकारी:
    महासभा के निर्वाचनों को निष्पक्ष व वैधानिक रूप से सम्पन्न करवाने के लिए प्रदेशाध्यक्ष एवं कार्यकारिणी समिति द्वारा एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया जायेगा जो संस्था के विधान व नियमों का पालन करते हुए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर निष्पक्ष रूप से सर्वसम्मति से या आवश्यकता होने पर गोपनीय मतदान द्वारा चुनाव सम्पन्न करवायेगा यही प्रक्रिया जिलाध्यक्षों एवं तहसील अध्यक्षों व कार्यकारिणी द्वारा जिला/तहसील के लिए अपनाई जायेगी।
  • जिला शाखाएँ:
    जिला शाखाएं महासभा का अंग होगी तथा महासभा के नियम/संविधान/निर्देशों की पालना करेगी। इसकी प्रकार तहसील शाखाएं, जिला शाखा का अंग होगी।
  • नवयुवक मंडल व महिला संगठन:
    1. महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रदेश, जिला, तहसील स्तर पर युवा महासभा एवं महिला महासभा का गठन किया जायेगा इनके स्वरूप, गठन, निर्वाचन, कर्तव्य की रूप रेखा/क्रियान्विति महासभा के प्रदेशाध्यक्ष द्वारा सम्पन्न की जावेगी।
    2. युवा महासभा एवं महिला महासभा प्रान्तीय महासभा के सहायक संगठन के रूप में कार्य करेंगे। यह सहायक संगठन महासभा के आदेश, निर्देश व सुझावों का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे और पालना न करने की स्थिति में महासभा (प्रदेशाध्यक्ष) इनको भंग कर चुनाव व तदर्थ समिति बनाकर नये संगठन बना सकेगी। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष युवा संगठन/महिला संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष/महिला प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करेंगे तथा उक्त दोनों प्रदेश अध्यक्ष अपनी-अपनी प्रदेश कार्यकारिणी एवं युवा जिला अध्यक्षों व महिला जिला अध्यक्षों की नियुक्ति/चुनाव महासभा के प्रदेशाध्यक्ष के लिखित अनुमोदन के पश्चात ही कर सकेंगे।
  • अन्य पदाधिकारिणी गण के कार्य:
    प्रदेशाध्यक्ष/प्रदेश उपाध्यक्षों, महामंत्रियों के कार्यों में अपने अपने क्षेत्र में सहयोग करना तथा महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्रदेशाध्यक्ष/महामंत्री के निर्देशानुसार कार्य करना।

सदस्यता से पृथकता

संस्था की सदस्यता से पृथकता निम्न कारणों से हो सकेगी। सदस्य द्वारा त्याग पत्र देने पर, सदस्य की मृत्यु होने पर, मस्तिष्क विकृत होने पर, संस्था के विधान के उद्देश्यों में आस्था ना रखने पर, कुप्रथाओं को प्रोत्साहन व प्रेरणा देने पर, संस्था के हितों के विपरीत कार्य करने पर, लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने पर, तथा न्यायालय द्वारा अपराधी माने जाने पर महासभा के सदस्य/कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारी/सदस्य पद से पृथक किये जाने का सम्पूर्ण अधिकारी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष को होगा तथा प्रदेशाध्यक्ष उक्त दायरा/परिधि में आते हैं तो संरक्षक महासभा की बैठक बुलाकर महासभा से अनुमोदन उपरान्त पृथक करने की कार्यवाही करेंगे।

महासभा (साधारण सभा) व कार्यकारिणी समिति की बैठक

  1. जयन्ती या पर्व के अवसर पर महासभा की बैठक वर्ष में एक बार आवश्यक रूप से होगी।
  2. प्रदेश कार्यकारिणी समिति की बैठक तीन माह में एक बार होगी तथा आवश्यकतानुसार समय-समय पर भी की जा सकेगी।
  3. साधारण सभा की लिखित सूचना कम से कम 10 दिन पूर्व एवम् प्रदेश कार्यकारिणी की सूचना सात दिन पूर्व दी जायेगी।
  4. उपरोक्तानुसार ही जिला, तहसील शाखाओं की महासभा कार्यकारिणी समिति बैठकें आयोजित होगी।
  5. युवा महासभा/महिला महासभा की प्रदेश/ जिला कार्यकारिणी की बैठकें भी उक्तानुसार प्रदेशाध्यक्ष महासभा के मार्गदर्शन अनुसार/ दिशा निर्देशानुसार होगी जिसमें प्रदेशाध्यक्ष/ प्रदेश महामंत्री महासभा को आमंत्रित लिखित में किया जायेगा।

गणपूरक

गणपूर्ति महासभा की साधारण सभा/कार्यकारिणी समिति की गणपूर्ति समस्त सदस्य संख्या का 1/3 एक तिहाई भाग होगा। गणपूरक (कोरम ) के अभाव में बैठक को स्थगित करना पड़े तो उसी उद्देश्य से बुलाई गई दूसरी बैठक में गणपूर्ति (कोरम) के अभाव में भी पूर्व निर्धारित विषयों पर ही विचार कर निर्णय लिया जा सकेगा तथा उस सभा (बैठक) में लिये गये निर्णय पूर्ण वैधानिक एवं मान्य होंगे।

निर्णय

सामान्यतः सभाओं में निर्णय उपस्थित सदस्यों द्वारा लिये जायेंगे किन्तु यदि सदस्य किसी विषय में एकमत ना हो और यदि अध्यक्ष की राह में तत्काल निर्णय आवश्यक हो तो अध्यक्ष मत लेगा और बहुमत से निर्णय लिया जावेगा। बराबर मत प्राप्त होने पर अध्यक्ष का मत निर्णायक मत होगा।

परिपत्र प्रस्ताव

आवश्यकता होने पर प्रदेशाध्यक्ष की सहमति से महामंत्री किसी प्रस्ताव को परिपत्र द्वारा सदस्यों के पास भेज सकेंगे। निश्चित अवधि तक यदि आधे से अधिक सदस्यों की अस्वीकृति प्राप्त नहीं हो तो प्रस्ताव स्वीकृत माना जायेगा। इस प्रकार के स्वीकृत प्रस्ताव का समिति की आगामी बैठक में अनुमोदन करवाना होगा।

उपसमितियाँ

संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अध्यक्ष/महामंत्री किसी भी सदस्य के संयोजन में आवश्यकता अनुसार विषयवार उप समितियां / विभिन्न प्रकार के प्रकोष्ठ बना सकेंगे तथा इस उप समितियों/ प्रकोष्ठों को उससे सम्बन्धित विषय की कार्य योजना बनाकर क्रियान्वयन के निर्देश दे सकेंगे।

संस्था का कोष

संस्था का कोष निम्न प्रकार संचित होगासदस्यता शुल्क/ अनुदान/ चन्दा/ सहायता व राजकीय अनुदान/ स्मारिका प्रकाशन, विज्ञापन मासिक / त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशन आदि से आय होगी। संस्था के उक्त संचित कोष की राशि राष्ट्रीय कृत बैंक में सुरक्षित रखी जायेगी।

संस्था के निरीक्षण का रजिस्ट्रार संस्थाएं

संस्था के निरीक्षण का रजिस्ट्रार संस्थाएं राजस्थान जयपुर को अधिकार होगा और उनके द्वारा दिये गये सुझावों की पूर्ति की जावेगी।

संस्था की समस्त चल/अचल सम्पति

संस्था की समस्त चल/अचल सम्पति पर संस्था का स्वामित्व एवं अधिकार होगा।

संविधान में संशोधन

संस्था के विधान में संशोधन व परिवर्तन राजस्थान संस्था पंजीकरण अधिनियम 1958 की धारा 12 के अनुसार होगा तथा उक्त संशोधन राजस्थान प्रान्तीय तैलिक साहू महासभा जयपुर की प्रदेश महासभा (साधारण सभा) की प्रान्तीय बैठक/अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुरूप होगा।

विघटन

संस्था का विघटन राजस्थान पंजीकरण अधिनियम 1958 की धारा 13 व 14 के अधीन होगा।

महासभा के उद्देश्य

प्रादेशिक, जिला, तहसील, ग्राम/नगर ईकाई स्तर पर संगठित कर सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवम् राजनैतिक उत्थान व विकास के लिए प्रयत्न करना।

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महासभा के कार्यक्रम

महसभा के सभी कार्यक्रमों की जानकारी यहाँ उपलब्ध है|

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